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युवा मतदाता प्रभावित करेगा ग्रामीण की राजनीति- डॉ. अभय ओहरी

breaking मध्यप्रदेश रतलाम

 डॉ. अभय ओहरी की कलम से

रतलाम ग्रामीण की विधानसभा सीट 2008 से अनुसूचित जनजाति वर्ग के लिए आरक्षित है। पूर्व में यह सीट अनारक्षित होने के कारण राजनैतिक दृष्टि से बहुत चर्चित और रतलाम की राजनीति को प्रभावित करने वाली थी क्योंकि शहर और ग्रामीण में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी कद्दावर नेता रहे है। शहर भाजपा का गढ़ है वहीं ग्रामीण क्षैत्र कांग्रेस का गढ़ रहा है। 2003 में भाजपा के धूलजी चौधरी निर्वाचित होने से इस क्षैत्र में कांग्रेस कमजोर हुई परंतु 2008  में आदिवासी सीट होेने के कारण पुनः कांग्रेस के पास लक्ष्मीदेवी खराड़ी के निर्वाचित होने से आदिवासी वोटो के कारण प्रभावित हुई। 2013 में भाजपा लहर में मथुरालाल डामर विजय हुवे जो भाजपके प्रत्याशी थे। वर्तमान में इस सीट की स्थिति उम्मीद्वार के चेहरे और कार्यक्षमता के आधार पर तय होगी और 2018 का विधानसभा परिणाम इस बात पर निर्भर होगा कि युवा मतदाता किसके साथ है। पिछले 15 वर्षों से दोनों ही पार्टीयों ने उम्मीद्वार कम शिक्षित उतारे जिसके कारण इस क्षैत्र का विकास और राजनैतिक दबदबा कम हुवा। इस बार के चुनाव में युवाओं की जागरूकता और बेहतर युवा विकल्प के कारण दोनो ही पार्टीयों को उम्मीद्वार चयन में सोच समझकर निर्णय लेना होगा अन्यथा रतलाम ग्रामीण जयस का बहुत मजबूत गढ़ बन गया है यहां के युवाओं का मतदान परिणाम बदलने में बहुत अहम रोल अदा करेगा। 1 लाख 97  हजार मतदाताओं में सबसे ज्यादा मतदाता आदिवासी वर्ग से है और आदिवासी मतदाताओं में जयस का अच्छा खासा प्रभाव है जो परिणाम बदल सकता है। अन्य वर्ग के मतदाताओं में पाटीदार, राजपूत, जाट, गुर्जर, धाकड़ और अनुसूचित जाति के मतदाताओं का रूझान परिणाम बदलने की क्षमता रखता है, अन्य वर्ग के मतदाता इस बार उम्मीद्वार की योग्यता, व्यवहार और क्षैत्र में उम्मीद्वार की सक्रियता कितनी रही है इस बात का आंकलन करके ही वोट डालेगा। भाजपा के लिए एट्रोसिटी एक्ट में बदलाव, किसान आंदोलन, बेरोजगारी, और महंगाई जैसे मुद्दों के साथ-साथ करणी सेना और सपॉक्स जैसे संगठनों से निपटना चुनौती होगी। वही चार गुटों में बटी कांग्रेस पार्टी की आपसी कलह एवं ग्रामीण क्षैत्रों में क्षैत्रिय सांसद की निष्क्रियता के साथ 15 सालों से सत्ता से दूर कांग्रेस के कार्यकर्ता एवं क्षैत्र की जनता आज भी पंडित मोतीलाल दवे जैसे नैतृत्व की कमी से निपटना बड़ी चुनौती होगी। वही इस बार जयस का ग्रामीण क्षैत्रों में बढ़ता प्रभाव चुनाव के परिणामों को प्रभावित करेगा। चुनाव का परिणाम जो भी होगा वो मतदाता तय करेंगे लेकिन इस बार के विधानसभा चुनाव रोचक एवं दिलचस्प होंगे।

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