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मजहब नही सिखाता दरिंदो को माफ करना

breaking मध्यप्रदेश रतलाम

रतलाम| (नगेंद्र सिंह झाला )

‘दरिंदो को फॉसी के फंदे पर लटका देखना चाहता हूं’ उक्त बात मध्यप्रदेश के सी.एम. श्री शिवराज सिंह ने सार्वजनिक समारोह में कहीं। आज देश एवं प्रदेश में दुष्कर्म-हेवानियत चरम पर है। छोटी-छोटी मासूम बच्चियों से लगाकर तरूण अवस्था, किशोर अवस्था, से लगाकर किसी भी उम्र की मां बहन-बेटी के साथ छेड़छाड़, कामातुर (बलात्कार) की घटनाएं बहुतायत में घट रही है। जबकि दुनिया के किसी भी धर्म-पंथ, जाति में अधर्म-अनुशासनहीनता की रत्तीभर भी गुंजाइश नहीं है। भक्ति मार्ग हो या ज्ञानमार्ग मानव अपनी-अपनी साधना पूजा जप-तप ध्यान, अपने-अपने शास्त्रानुसार करता आया है। वर्तमान में सभी धर्मों के धर्माचार्य, समाजशास्त्रियों, विवेकशील विभूतियों को यह चुनौती स्वीकार करने की आवश्यकता है, कि ‘भारतीय समाज में जो अश्लील विकृतियां जन्म ले रही है’ उन्हे नस्तेनाबूत करने वेâ लिए यथासम्भव अपने-अपने परिवारजनों को मोटीवेट करें। आस-पड़ोसी को व क्षैत्रवासियों के बीच जाकर ‘चरित्र निर्माण’ से सम्बंधित छोटे-छोटे शिविर वैंâप लगाकर इस बात से जागरूक करे, कि वर्तमान में युवा रास्ता क्यों भटक रहा है। वह विवेकशील वैâसे बन पायेगा..? आदि युवा मन के विचारों में सात्विक ऊर्जा भरकर युवाओं का मार्गदर्शन करने की आवश्यकता है। क्योंकि अपराधी की तो न तो कोई जात होती है औ ना ही कोई धर्म होता है। हमारा समुचा भारतीय समाज एकसूत्र में बंधा हुआ है। आज मंदसौर एवं सतना जिले की परसमनिया गांव की घटना से स्पष्ट होता है, कि कुछ बदचलन विकृत बुद्धि वाले मानव समाज की गरीमा को तार-तार करने में लगे हुए है। ऐसे हैवानियत के दानवों को धरती पर जिंदा रहने का किसी भी प्रकार का अधिकार नही है। आज हम मूल्कवासियों को संसद एवं राज्यों की विधानसभा द्वारा बनाये कानून एवं माननीय न्यायपालिका पर पूर्ण विश्वास करने की आवश्यकता है। देश-प्रदेश में कानू के दायरे में अपनी भावनाएं उजागर करने का हमें हक है। वही हमारा फर्ज भी हैं कि हम देश की एकता अखण्डता सम्प्रभूता के प्रति सजग रहे। और समाजकण्टकों के बहकावे में न आवे।

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