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नगर में निकला ऐतिहासिक पथ संचलन, हज़ारों की संख्या में स्वयंसेवक रहे उपस्थित

breaking रतलाम
 रतलाम ।
 भारत भूमि सदैव अत्याचार एवम् आतंक से संघर्ष करने वाली तथा बलिदान की भूमि रही है अतः इस भारत भूमि पर जन्म लेना परम सौभाग्य की बात है । जब जब समाज में विभाजन की स्तिथि उत्पन्न होती रही है तब तब समाज में से ही ऐसे महापुरुष प्रकट हुये , जिन्होंने समाज में विभाजन को समाप्त कर समाज को एक सूत्र में संगठित करने का कार्य किया । प्रभु श्री राम ने सभी सामान्य जनों केवट , निषादराज , शबरी , जटायु , वानर को सहभागी बनाकर अत्याचारी रावण के आतंक को समाप्त किया । भगवान् श्रीकृष्ण ने ग्वाल बालों की सहभागिता से कंस के आतंक का विनाश किया । इन्हीं प्रेरणा पुञ्ज से प्रेरणा लेकर डॉ हेडगेवार ने हिन्दू समाज को संगठित करने के लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना की । आज भी हिन्दू समाज को विभाजित करने के लिए राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय षड्यंत्र हो रहे है । पिछले कुछ समय से देश में जातिगत आंदोलनों की गहराई से जाँच पड़ताल करते है तो पता चलता है कि इसके आर्थिक स्त्रोत एवम् वैचारिक स्त्रोत विदेशी भूमि में पाये गए । इस वर्ष संचलन के पूर्व बौद्धिक सुनने हेतु हिंदू समाज के 25 समाजों के प्रतिनिधी उपस्थित रहे यह अपने आप में सामाजिक समरसता की अनोखी मिसाल है ! उक्त विचार राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के उज्जैन विभाग संघचालक श्री बलराज भट्ट ने विजया दशमी के उपलक्ष में रतलाम नगर के पथ संचलन के अवसर पर अपने सम्बोधन में व्यक्त किये । इस अवसर पर मंच पर प्रसिद्ध समाजसेवी एवं उद्योगपति राजेश पटेल , रतलाम जिला संघचालक वीरेंद्र वाफगांवकर, नगर संघचालक सुरेन्द्र सुरेका आसीन थे । मुख्य वक्ता बलराज भट्ट के उदबोधन के पश्चात् संघ के स्वयंसेवको का घोष की मधुर धुन पर अनुशासनबद्ध पथ संचलन नगर के विभिन्न मार्गो पर निकला । विभिन्न वाहिनियों से सुसज्जित भगवा ध्वज को धारण करते हुए हजारों स्वयंसेवक कदम ताल करते हुए पुनः प्रारम्भ  स्थल पर पहुँचा । नगर के विभिन्न मार्गो पर समस्त हिन्दू समाज ने पुष्प के माध्यम से स्वयंसेवको का उत्साहवर्धन किया । इस अवसर पर समारोह में निर्वाचित जनप्रतिनिधि , संघ के प्रांतीय , विभागीय , जिला एवम् नगर के दायित्ववान अधिकारी गण सहित लगभग 3 हजार स्वयंसेवक उपस्थित थे ।

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