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कांग्रेस भाजपा की गुटबंदी से जनता हो रही परेशान

breaking मध्यप्रदेश रतलाम

रतलाम। (डॉ. सैय्यद अनवर अली)

म.प्र. कांग्रेस समन्वय समिति अध्यक्ष दिग्विजय सिंह (कांग्रेसी राजा सा.) प्रदेशभर में जहां भी जा रहे है, कही अन्न हाथ में लेकर कांग्रेस जिताने के लिए कांग्रेसियों को शपथ दिला रहे है, तो कही कसम खिला रहे है। क्योंकि दिग्विजय सिंह सहित अन्य नेता सब एक-दुसरे को भली-भांति जानते है। और ये भी जानते हैं, कि राजनीति में वादे शपथ-कसम का मोल कब कितना रहता है। कांग्रेस ही नहीं प्रजातंत्र की लगभग अधिकांश राजनैतिक दलों के नेता और उनके पट्ठे समय और परिस्थितियों को भांप कर ही दल-बदल करते हैं, या फिर दल में रहकर भीतरघात करते है। चालाक नेता दल कम ही बदलता है, वह तो अपने गुर्गो को निर्दलिय चुनाव में खड़ा कर अपने प्रतिद्वंदी से हिसाब चुकता करता है। या फिर अन्य राजनैतिक दल के प्रत्याशी को विजयश्री दिलवाने में परोक्ष और कभी-कभी प्रत्यक्ष भी सहयोग करता है। राष्ट्रीय साप्तहिक जनवकालत में मध्यप्रदेश के राजनैतिक दिग्गजों के संदर्भ में जो पिछले अंकों में छापा गया। वह सच साबित होता नजर आ रहा है। भाजपा की खेमेबाजी भी सर चढ़कर बोल रही है। इंदौर में  विजयवर्गीय जी ने किसान रैली निकालकर जहां कांग्रेस को आयना दिखाने का प्रयास किया। वही स्वयं की पार्टी में भी ‘अभी मैं हू’ के मंत्र को सार्थक किया है। पार्टी सूत्रों की माने तो शिवराज गुट को कमजोर कर केन्द्रीय नैतृत्व अपने दम (बलबूते) पर विधानसभा चुनाव में प्रत्याशी उतारने की रणनीति पर विचार कर रही है। भाजपा की अंदरूनी खिचड़ी में कई पुराने चावल जल गये है, या जल रहे है। मोदी जी की राजनैतिक आंच में नये चावलों का राजनैतिक पुलाव का स्वाद वैâसा रहेगा..? लेकिन 06 जून 2018 की कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल जी की सभा का असर राजनैतिक गलियारें में क्रमशः घटता नजर आ रहा है। क्योंकि कई गुटों में बटे कांग्रेसी असंतुष्ट अभी भी संतुष्ट नहीं हो पाये है। रतलाम शहर जिले के कांग्रेसी आज भी एक जाजम पर नहीं है। जाति-धर्म, पंथ में बटे नेताओं को एक सूत्र में बांधने वाला हायकमान के पास कोई नही है। जिससे कांग्रेस धड़ेबाजी में बटी हुई है। कुछ मुट्ठीभर, कभी कांग्रेस को असली तो कभी नकली तो कभी अवसरवादी बताकर नेतागिरी चला रहे है। प्रदेशभर में कांग्रेसी एकजुट कब होंगे..? कांग्रेसियों की पूâट का फायदा निश्चित रूप से भाजपा को मिलेगा और यदि ऐसा हुआ तो मध्यप्रदेश में चौथी बार भाजपा को सत्तासीन होने से कोई नहीं रोक पायेगा। आखिर प्रदेश एवं देश की आम जनता के अनुरूप कांग्रेसी कब इन्द्रा कांग्रेस के सपूत बनेंगे..?

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