
रतलाम/जनवकालत न्यूज़। जिले की पुलिस ने साइबर अपराध के खिलाफ अब तक की सबसे बड़ी कार्यवाही करते हुए एक अंतरराज्यीय गिरोह का पर्दाफाश किया है। नवीन पुलिस कंट्रोल रूम पर एसपी अमित कुमार ने पत्रकारवार्ता में बताया कि रतलाम पुलिस ने ‘डिजिटल अरेस्ट’ के नाम पर एक व्यक्ति से 1.34 करोड़ रुपये की ठगी करने वाले गिरोह के सदस्यों को देश के विभिन्न राज्यों से गिरफ्तार किया है। इस गिरोह ने फरियादी को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाकर करीब एक महीने तक मानसिक दबाव में रखा था।

यह है पूरा मामला-
घटना की शुरुआत 15 नवंबर 2025 को हुई, जब फरियादी को एक अज्ञात नंबर से कॉल आया। फोन करने वाले ने खुद को मुंबई क्राइम ब्रांच का अधिकारी बताया। जालसाजों ने फरियादी को डराया कि उसके आधार कार्ड का उपयोग केनरा बैंक में 247 करोड़ रुपये की मनी लॉन्ड्रिंग के लिए किया गया है।
फरियादी को डराने के लिए आरोपियों ने Signal App पर वीडियो कॉल किया, जिसमें उन्होंने बाकायदा अदालत, जज और वकीलों का एक फर्जी सेटअप (सेट) तैयार कर रखा था। इसे ही ‘डिजिटल अरेस्ट’ कहा जाता है, जहां पीड़ित को घंटों कैमरे के सामने रहने को मजबूर किया जाता है। इस डर का फायदा उठाकर आरोपियों ने 15 नवंबर से 12 दिसंबर के बीच फरियादी से कुल 1 करोड़ 34 लाख 50 हजार रुपये ऐंठ लिए।
SIT का गठन और देशव्यापी छापेमारी-
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक श्री अमित कुमार के निर्देशन में 18 सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) का गठन किया गया। पुलिस ने तकनीक और बैंक खातों के विश्लेषण के आधार पर देश के अलग-अलग हिस्सों में दबिश दी।

- जबलपुर (मप्र): यहाँ से अशोक जायसवाल, सनी जायसवाल, सारांश तिवारी और एक नाबालिग को पकड़ा गया। इनके खातों में 14 लाख रुपये आए थे।
- नीमच (मप्र) : आरोपी पवन कुमावत को गिरफ्तार किया गया, जिसके खाते में 14 लाख की संदिग्ध राशि मिली।
- उत्तर प्रदेश: यहाँ से एक NGO संचालक अमरेन्द्र कुमार को पकड़ा गया, जिसके खाते में 50 लाख का लेन-देन हुआ था।
- गुजरात: आरिफ, हमीद खान, शाहिद और सादिक को गिरफ्तार किया गया। ये लोग ठगी की रकम से क्रिप्टो करेंसी खरीद रहे थे।
संगठित अपराध की धाराएं बढ़ाई गईं-
पुलिस ने इस मामले में थाना डीडी नगर पर धोखाधड़ी और आईटी एक्ट की धाराओं के साथ-साथ अब BNS की धारा 111 (संगठित अपराध) को भी जोड़ दिया है। पुलिस की एक टीम फिलहाल बिहार में अन्य आरोपियों की तलाश कर रही है।
इनकी रही सराहनीय भूमिका-
इस बड़े खुलासे में निरीक्षक अमित कोरी, निरीक्षक शंकर सिंह चौहान, उप निरीक्षक अनुराग यादव, उप निरीक्षक प्रवीण वास्कले, उप निरीक्षक जीवन बरिया, प्र. आर. हिम्मत सिंह, प्र. आर. मनमोहन शर्मा, प्र. आर. लक्ष्मीनारायण सूर्यवंशी, आरक्षक राहुल पाटीदार, तुषार सिसोदिया, मोर सिंह, विपुल भावसार, आरक्षक मयंक व्यास, आरक्षक पवन जाट, आरक्षक सुनील (थाना दीनदयाल नगर), आरक्षक संजय कुशवाहा (थाना दीनदयाल नगर) की मुख्य भूमिका रही। एसपी ने पूरी टीम की पीठ थपथपाई है।
एसपी अमित कुमार ने की सावधानी की अपील-
रतलाम जिला पुलिस अधीक्षक अमित कुमार ने नागरिकों से अपील की है कि कोई भी पुलिस अधिकारी वीडियो कॉल पर ‘डिजिटल अरेस्ट’ नहीं करता है। ऐसे किसी भी कॉल आने पर तुरंत स्थानीय पुलिस या साइबर हेल्पलाइन को सूचना दें।
