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यातायात सुधार तथा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए नागरिकों में स्व-अनुशासन अनिवार्य

breaking रतलाम

रतलाम।

किसी भी स्थान पर यातायात के सुधार तथा दुर्घटनाओं को रोकने के लिए शासन-प्रशासन के प्रयास तो जरूरी है। इसके अलावा नागरिकों में भी स्व-अनुशासन की भावना होना अनिवार्य है। नागरिक स्वयं आगे बढ़कर यातायात नियमों का पालन करें। तभी दुर्घटनाएं रुक सकती हैं, अव्यवस्था से बचा जा सकता है। यह उद्गार आज रतलाम में 30 वे सड़क सुरक्षा सप्ताह के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में विभिन्न वक्ताओं ने व्यक्त किए।

इस कार्यक्रम में महापौर डॉ. सुनीता यार्दे, पूर्व महापौर श्री पारस सकलेचा, नगर निगम नेता प्रतिपक्ष श्रीमती यास्मीन शेरानी, कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान, पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी, रेलवे डीआरएम श्री आरएन सुनकर, सीईओ जिला पंचायत श्री सोमेश मिश्रा, अपर कलेक्टर सुश्री निशा डामोर, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा, डिप्टी कलेक्टर श्रीमती कामिनी ठाकुर, सीएसपी शहर श्री विवेक सिंह चौहान, निगमायुक्त श्री एस.के. सिंह, जिला शिक्षा अधिकारी श्री अमर वरधानी, एसडीओपी रतलाम ग्रामीण श्री मान सिंह चौहान, डीएसपी ट्रैफिक श्री विलास वाघमारे, ट्रैफिक सूबेदार मोनिका सिंह चौहान, लायंस क्लब, रोटरी क्लब के पदाधिकारी, स्काउट एनसीसी के विद्यार्थी तथा शहर के नागरिक उपस्थित थे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए महापौर डॉ सुनीता यार्दे ने कहां कि दिमाग को ठंडा रखकर यातायात नियमों का पालन करके प्रत्येक व्यक्ति वाहन चालन करें तो दुर्घटना नहीं होगी। विद्यार्थी तथा बच्चे ज्यादा से ज्यादा साईकिल का इस्तेमाल करें। गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल से बातें बिल्कुल न करें। यातायात नियमों का पालन करना हम सब की सामूहिक जिम्मेदारी है। महापौर ने कहा कि जीवन अनमोल है और इसको सुरक्षित रखना हमारा कर्तव्य है। यातायात नियमों का पालन और अनुशासन प्रत्येक अभिभावक अपने बच्चों को बचपन से ही सिखाएं, इसे अपने संस्कारों में ढाला जाए। नगर निगम नेता प्रतिपक्ष श्रीमती यास्मीन शेरानी ने अपने उद्बोधन में नियमों के पालन पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि अगर हम यातायात के नियमों का पालन करेंगे तभी सुरक्षित रह सकेंगे।

पूर्व महापौर श्री पारस सकलेचा ने संबोधित करते हुए कहा कि यह गंभीर विषय है। ट्रैफिक नियमों का पालन करवाने हेतु सभी को सजग रहना होगा। रोड सेफ्टी का ऑडिट करवाना होगा, सड़कों पर कहां, संकेतक लगे हैं कहां नहीं लगे हैं, इसको चिन्हांकित करते हुए संकेतक लगवाया जाए। इंडियन रोड कांग्रेस के पैरामीटर्स के अनुसार सड़कों पर स्पीड ब्रेकर बनवाए जाएं। सब के सामूहिक प्रयासों से ही दुर्घटनाओं की रोकथाम हो सकती है।

कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान ने अपने उद्बोधन में सड़क सुरक्षा सप्ताह के आयोजन को महत्वपूर्ण बताया। उन्होंने कहा सब लोग समझे कि मानव जीवन कितना अनमोल है। जिला प्रशासन पुलिस यातायात विभाग के साथ मिलकर जिले में समग्र बिंदुओं पर योजना बनाकर इस दिशा में काम कर रहा है। हमारे द्वारा ट्रैफिक डिसिप्लीन और यातायात सुधार से संबंधित सभी विभागों को प्लेटफॉर्म पर एकीकृत किया जा रहा है ताकि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए पुख्ता इंतजाम किए जा सके। स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों द्वारा अपने पेरेंट्स को पोस्टकार्ड भी लिखे जाएंगे जिसमें बच्चे अपने पेरेंट्स से यातायात नियमों के पालन का आग्रह करेंगे। बच्चे जिद करेंगे कि उनके पैरेंट्स हेलमेट जरूर खरीदें बच्चों का प्रयास बहुत प्रभावी होगा। कलेक्टर ने कहा कि आज की लाइफ बहुत फास्ट हो गई है लेकिन हम वाहन चालन में अपनी स्पीड एक निर्धारित सीमा में ही रखें। जल्दबाजी में ओवरटेकिंग नहीं करें, नहीं तो किसी भी परिवार को बहुत बड़ा नुकसान हो सकता है।

पुलिस अधीक्षक श्री गौरव तिवारी ने अपने संबोधन में कहा कि यातायात नियमों का ज्ञान सबको होता है परंतु इनका पालन भी होना बहुत जरूरी है। नियमों के पालन स्व-अनुशासन  से ही संभव है। यातायात सप्ताह के संदर्भ में पुलिस अधीक्षक ने कहा कि यातायात विभाग एक अनूठी पहल करते हुए इस सप्ताह के दौरान वाहनों के चालान नहीं बनाएंगे बल्कि नागरिकों को जागरुक करने का महत्वपूर्ण कार्य किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जिले में दुर्घटनाओं को रोकने के लिए सुनियोजित ढंग से काम किया जाएगा। इस कार्य योजना में कलेक्टर श्रीमती रुचिका चौहान द्वारा सराहनीय सहयोग दिया गया है। जिला प्रशासन ने अन्य संबंधित विभागों को भी कार्य योजना में सम्मिलित किया है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि सड़क दुर्घटनाओं की रोकथाम के लिए हम नवाचार भी कर रहे हैं। दुर्घटना से कोई भी परिवार वर्षों पीछे चला जाता है। यातायात नियमों का शत-प्रतिशत व्यक्तियों द्वारा पालन आवश्यक है क्योंकि एक व्यक्ति यदि नियम का पालन करता है परंतु सड़क पर सामने वाला वाहन चालक पालन नहीं करता है तो भी दुर्घटना होती है। दुर्घटना की रोकथाम के लिए पालक अपने नाबालिक बच्चों को वाहन नहीं चलाने दे। सड़क की निर्धारित गति सीमा के अनुसार ही वाहन की स्पीड रखी जाए। जिले में हाईवे तथा सड़कों के नजदीकी प्राइवेट अस्पतालों और डॉक्टरों को भी सूचीबद्ध किया जा रहा है जिससे सड़क दुर्घटना में घायल की जान बचाने में तत्परता से कार्य किया जा सके। कानूनन कोई भी प्राइवेट डॉक्टर किसी घायल का उपचार करने में मना नहीं कर सकता है। प्रायवेट एंबुलेंस को भी डायल 100 तथा 108 वाहन सेवाओं में सम्मिलित किया जा रहा है। हाईवे से लगने वाली लिंक सड़कों पर स्पीड ब्रेकर अनिवार्य रूप से बनाएंगे। इस संबंध में लोक निर्माण विभाग तथा मध्य प्रदेश सड़क विकास निगम के अधिकारियों को निर्देशित किया गया है। यातायात सप्ताह के दौरान आगामी दिनों जिले के थाना प्रभारी, चौकी प्रभारी अपने क्षेत्र के स्कूलों में जाकर बच्चों को जागरूक करेंगे।

रेलवे डीआरएम श्री आरएन सुनकर ने अपने संबोधन में कहा कि सड़क सुरक्षा सप्ताह का आयोजन सराहनीय है। यह लोगों को दुर्घटनाओं की रोकथाम तथा बेहतर यातायात की दिशा में जागरूक करेगा। उन्होंने कहा कि गाड़ी चलाते वक्त मोबाइल से बात बिल्कुल नहीं करें। कोई भी सड़क दुर्घटना परिवार के लिए एक त्रासदी होती है। डीआरएम द्वारा रेलवे स्टेशंस तथा रेल लाइनों पर दुर्घटनाओं की रोकथाम की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी भी दी गई।

कार्यक्रम के प्रारंभ में अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक श्री प्रदीप शर्मा ने अपने उद्बोधन ने बताया कि रतलाम में अपने 2 वर्षीय सेवाकाल के दौरान उनके द्वारा लगभग 200 सड़क दुर्घटनाएं देखने में आई है। इसी तरह देशभर में लगभग डेढ़ लाख मौतें, प्रत्येक वर्ष सड़क दुर्घटनाओं में होती हैं। इन दुर्घटनाओं से देश को प्रतिवर्ष 60 से 70 हजार करोड़ रुपए का नुकसान भी होता है। कार्यक्रम में श्री सलीम मोहम्मद, श्री संदीप निगम, पत्रकार श्री राकेश पोरवाल ने भी यातायात सुधार के संबंध में अपने विचार रखें।

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