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रतलामी सीट पर महिला योग प्रबल…

breaking रतलाम

प्रकाश तंवर
प्रदेश में चुनावी सरगर्मी से राजनैतिक तापमान चरम पर है। नेता लोग स्वयं के लिए और अपने आकाओं के लिए तरह-तरह के टोने-टोटके करने से भी नहीं चुक रहे है। जो विधायक के टिकिट की दौड़ में है, वो और उनके अनुयायी मंदिर, मस्जिद, गिरजा, गुरूद्वारा सहित बाबा, फकीरों के दर पर मथ्था टेक रहे है, तो कुछ ज्योतिषियों एवं भविष्य वक्ताओं के चक्कर काट रहे है। रतलाम शहर की राजनीति में विधायक बनने में ‘‘स्त्री योग’ होेने से राजनैतिक पार्टीयां महिला उम्मीद्वारों पर भी विचार कर रही है। भाजपा में विधायक पद के लिए पुरूषों की प्रधानता है, वही कांग्रेस में महिला-पुरूषों की उम्मीद्वारी को लेकर पार्टी में अंदर ही अंदर घमासान चल रहा है। राष्ट्रीय साप्ताहिक जनवकालत की सर्वे टीम से पता चला कि यदि कांग्रेस की वादाखिलाफी करने वाले, मौकापरस्त को टिकिट दिया गया,
तो किसी भी निर्दलिय महिला प्रत्याशी को रतलामी मतदाता अपना प्रतिनिधि बनाने में ज्यादा रूची दिखाएंगे। ऐसे में यदि कांग्रेस नैत्रीयों को विधायक पद का उम्मीद्वार बनाया जाात है तो पुरूषों के टोने-टोटके धरे रह जायेंगे। कांग्रेस के श्री सतीश पुरोहित, श्रीमती प्रेमलता संजय दवे, श्रीमती अदिति दवेसर, भाजपा से श्रीमती अनीता कटारिया, श्रीमती आशा मोर्य, आदि राजनैतिक नेता -नैत्रियों के नाम रतलामी मतदाताओं की जुबान पर है। राजनैतिक गलियारे में कांग्रेस के सरपरस्त एवं मौकापरस्तों के बीच जमकर तू-तू, मैं-मैं, चल रही है। सत्ताधारी स्मार्ट सिटी तथा जनकल्याणकारी योजनाओं के दम पर आमजन के बीच जाने का साहस करेंगे। वही कांग्रेस बेरोजगारी, महंगाई, पेट्रोल, डीजल सहित स्थानिय समस्याओं को उजागर करने मतदाताओं के बीच जाएंगे। लेकिन रतलामी मतदाता स्वविवेकी है। वह किसी भी प्रकार के प्रलोभन और बरगलाने में आने वाला नहीं है। स्वस्थ चित्त से निर्भिक होकर शत्-प्रतिशत मतदान करने में अपनी पूर्ण रूचि रखने वाला मतदाता है। रतलामवासियों ने कभी भी सत्ता के नाम पर अपना मत नहीं दिया। यदि दिया होता तो सालो साल कांग्रेस प्रदेश एवं देश में सत्तासीन रही, तो क्यों नहीं कांग्रेसी उम्मीद्वार को भोपाल पहुंचाया। रतलामवासी हमेशा राजनैतिक लहर की चकाचौंध से नहीं, अपितू व्यक्तित्व के आधार पर अपना प्रतिनिधि चुनता आया है। लेकिन दुर्भाग्य यह रहा कि ‘‘ जिन्हे हम ‘हार’ समझते थे, गला सजाने को, वही अब ‘नाग’ बन बैठा हमारे काट खाने को’’…… जनता जानती है वोट किसे देना है।

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