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कांग्रेसी भाजपाई भीतर घातियो से रहे सावधान…

breaking मध्यप्रदेश रतलाम

राजेश झाला ए.रज़्ज़ाक|

प्रजातंत्र में वंशवाद का घालमेल चरम पर है| देश की लगभग अधिकांश छोटी-बड़ी राजनीतिक पार्टियों में भाई-भतीजावाद बहुतायत में फल फूल रहा है| कभी कांग्रेस पर सार्वजनिक रूप से आरोप लगाने वाली अपने आप को अनुशासित कहने वाली भाजपा भी वंशवाद के भवर में उलझी नजर आ रही है| कांग्रेस और भाजपा के राष्ट्रीय नेता जरूर समय-समय पर इन मुद्दों पर बयान देते रहते हैं| लेकिन देशवासी जानते हैं कि, अमल कितना होगा? राजस्थान, छत्तीसगढ़, मध्यप्रदेश सहित अन्य राज्यों में विधानसभा की तारीख निश्चित हो गई है, आचार संहिता लग चुकी है| लेकिन सत्ताधारीओं द्वारा आम जनता को अभी भी लुभाना पड़ रहा है| मध्यप्रदेश में वर्षों से भाजपा काबीज है, फिर भी मतदाताओं के मूड से भाजपाइयों के पसीना टपकने लगे हैं| वैसे तो कांग्रेस के पास खोने को कुछ भी नहीं है! इसलिए अभी भी अंदर ही अंदर भीतरघात की तैयारी कुछ जयचंद कर रहे हैं| कुछ धंधेबाज अपने सिंडिकेट को किसी भी कीमत पर कमजोर नहीं होने देने के चक्कर में कांग्रेस को विधानसभा में सिर्फ सशक्त विपक्ष के रूप में ही देखना चाह रहे हैं| मध्यप्रदेश के रतलाम जिले की कांग्रेसी राजनीति में भूचाल आ गया है| कुछ छूट भैया भी अपना टिकट पक्का मान अपने आकाओं की शान में कसीदे पढ़ रहे हैं| कुछ आलाकमान के दम पर स्थानीयों को हम रोक रहे हैं, ऐसी दशा में खेमेबाजी के चलते टिकट किसी का भी फाइनल हो, लेकिन नेताओं की आपसी खींचतान, वैमनस्यता के चलते “निपटाने” वाली गणित कांग्रेस में ज्यादा कारगर होगी| वहीं भाजपा भी  येन केन प्रकारेण यही चाहती है कि, उसके प्रत्याशी के सामने कांग्रेस का कमजोर कैंडिडेट ही उतरे, ताकि मतदाताओं के गुस्से का शिकार ना होना पड़े| स्मरण रहे यदि रतलाम शहर एवं रतलाम ग्रामीण से आयातित बाहर का उम्मीदवार कांग्रेस खड़ा करेगी तो, निश्चित रूप से स्थानीय कांग्रेसी इतना पसीना बहाएंगे कि, प्रत्याशी को चुनाव मतदान के पहले तक भोपाल के सपने देखने को मजबूर होना पड़ेगा, तथा परिणाम आने पर ही सारे सपने चूर चूर होंगे | कांग्रेस में 1 दिन का नया सदस्य भी “निपटाने” की गणित में पारंगत होता है|

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