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जनसमस्या यथावत, नेता कर रहे भावनाओं के साथ खिलवाड़

breaking रतलाम

रतलाम। (नगेन्द्र सिंह झाला)

जनता का दिल विशाल है। नेता यह बात जानते है। आज देश में भारतीय जनता पार्टी की बहुमत की सरकार है। म.प्र. में भी श्री शिवराज की बहुमत की सरकार वर्षों से काम कर रही है। यहां तक कि रतलाम नगर निगम भी पूâल छाप है। ऐसे में भाजपा पार्षद और महापौर रतलामी नागरिकों की आवश्यक अनिवार्य सेवाओं की अनदेखी कर रहे है। वर्षों से भाजपा शहर से लगाकर प्रदेश व देश में सत्तासीन है। फिर भी गर्मी में पानी की किल्लत से और बरसात में भी पानी की वजह से परेशान है। गर्मी में पीने योग्य पानी सत्ताधारी उपलब्ध करवाने में नाकाम रहे, वही अब बारिश के पानी की वजह से सड़के,गटरे जाम है सर्वत्र कीचड़ ही कीचड़ है ऐसे में नेताद्वेय पुनः कमल खिलाने की जुगत में लगे है। दुर्भाग्य यह है कि जनता ने जिन्हे सत्तासौपी वह विपक्ष की तरह जनता को समझाने में लगे हैं कि अफसर हमारी नही सुन रहे है। यदि अधिकारी सरकार के नुमाइंदों की नहीं सुन रहे, तो जनप्रतिनिधि का दायित्व क्यों निभा रहे है। तुरंत अपने पद से हट क्यों नहीं रहे..? ताकि आमजन योग्य जनप्रतिनिधियों को नगर निगम सहित विधानसभा, लोकसभा में कर्मठ नैतृत्वकर्ता को मतदाताओं द्वारा चुनकर भेजा जा सके। यदि मोदी सरकार को विधानसभा-लोकसभा का चुनाव एक साथ करवाने का मन है, तो म.प्र., राजस्थान, छत्तीसगढ़ के साथ लोकसभा चुनाव का प्रयोग करके देख ले। ताकि ये अरमान भी पूरे हो जायेगें। जनता बैचारी नेताओं के बहकावे में आकर सभी मान लेती है। पिछले समय परेशान नागरिक पार्षदो, महापौर के घर पहुुंचे तो नैतृत्वकर्ताओं ने यह कहते हुए समझा दिया कि हम तो आपके साथ है। अधिकारी काम नहीं कर रहे। भोली-भाली जनता यह नहीं जानती कि अधिकारी अफसर तो नियमानुसार अपने दायित्वों का निर्वहन करने के लिए वचनबद्ध है। फिर नेता जनहित के कार्य करवाने में पीछे क्यों हैं..? यदि भूमाफियाओं के कार्य सहित अन्य रसदार काम हो, तो अधिकारी नेता तत्काल काम को अंजाम देते है। ऐसा कब तक चलेगा…? अच्छे दिन की आस में भावना प्रधान भारतवासी कब तक ठगाते रहेंगे…?

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